मंगलवार, 11 मार्च 2014


विध्या प्राप्ति आराधना मंत्र

आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में अपने परिश्रम को सर्वोपरि मानते हुए एकाग्रचित होकर माँ शक्ति (शिव,दुर्गा )कि आराधना व् ध्य़ान करने से विध्या व् लक्ष्मी प्राप्ति के योग प्रबल बनते है। जिन  विद्या प्राप्त करनी है। वो सोमवार या शुक्रवार से एन श्लोको का 21 या 51 बार पठन करे।
                     जयन्ती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी।
                     दुर्गा क्षमा शिव धात्री स्वाहा अवधा नमोस्तुते।।
                     विधावंत यशस्ववंत लक्ष्मीवंत जनं कुरु।
                      रूञ्प देहि जन्य देहि यशो देहि द्विषोजहि।।
 इन श्लोको को रोज सुबह के समय माँ शक्ति आराधना करते हुए उच्चारण करे। लक्ष्मी प्राप्ति के लिए व् यश प्राप्ति के लिए ,विजय प्राप्ति के लिए इन श्लोको का जाप काफी हितकारी सिद्ध हुआ है।  लेकिन आराधना लाल या पीले वस्त्र धारण कर करने से अच्छे फल कि प्राप्ति होती है।अतः घर में सुख व् शांति के लिए भी इस मंत्र का उच्चारण  करने से लाभ है।
                       ओम ऐ ही क्ली चामुण्डायै विच्चै।

इस मंत्र का 101 बार जप करने से विध्यार्थी एव प्रतियोगी इन मंत्रो के जप से अपनी पढ़ाई आरम्भ कर सकते है। आज कल के बच्चे परिणाम को लेकर काफी उत्साहित रहते है। और क्यों न हो।  वह इतनी मेहनत करते है। किन्तु वो उतने नम्बर नही ला पते जितने उनके माँ - पिता चाहते है। तो ऐसे में निराश न हो और इन मंत्रो का जाप करे।  सफल होगे।
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